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Showing posts from June, 2025

Bhartiya yog kitne prakar ke Hain

 भारतीय योगशास्त्र में योग के कई प्रकार बताए गए हैं। मुख्य रूप से निम्नलिखित प्रकारों को जाना जाता है:  * ज्ञान योग: यह आत्मज्ञान और आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करने पर केंद्रित है। इसमें विचारों की उन्नति और सत्य की खोज पर जोर दिया जाता है।  * कर्म योग: यह कर्मों में कुशलता लाने और निष्काम भाव से कर्म करने पर आधारित है। इसका अर्थ है फल की इच्छा के बिना अपने कर्तव्यों का पालन करना।  * भक्ति योग: यह ईश्वर के प्रति प्रेम, समर्पण और भक्ति पर केंद्रित है। इसमें भजन-कीर्तन, पूजा-पाठ और भावनात्मक जुड़ाव के माध्यम से परमात्मा से जुड़ने का प्रयास किया जाता है।  * राज योग: महर्षि पतंजलि द्वारा प्रतिपादित राज योग को अष्टांग योग भी कहा जाता है, क्योंकि इसके आठ अंग हैं:    * यम: अहिंसा, सत्य, अस्तेय (चोरी न करना), ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह (संग्रह न करना)।    * नियम: शौच (पवित्रता), संतोष, तप, स्वाध्याय (आत्म-अध्ययन) और ईश्वर प्राणिधान (ईश्वर के प्रति समर्पण)।    * आसन: शारीरिक मुद्राएं जो शरीर को स्थिर और स्वस्थ बनाती हैं।    * प्राणायाम: ...

योग विद्या का मूल स्रोत वेद है

 BRIJESH sir  योग विद्या का मूल स्रोत वेद हैं। योग का सबसे पहला उल्लेख ऋग्वेद में मिलता है। इसके अलावा, यजुर्वेद और अथर्ववेद में भी योग से संबंधित मंत्र और अवधारणाएं मिलती हैं। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि वेदों में योग का उल्लेख शुरुआती रूप में है, जहां यह मुख्य रूप से ध्यान, एकाग्रता और आंतरिक अनुशासन के रूप में वर्णित है। बाद के उपनिषदों, जैसे कठोपनिषद, और फिर पतंजलि के योगसूत्र में योग को एक अधिक व्यवस्थित और विस्तृत दर्शन के रूप में विकसित किया गया। तो, अगर कोई एक वेद पूछा जाए, तो ऋग्वेद सबसे पहला है जहाँ "योग" शब्द का उल्लेख मिलता है, लेकिन योग की अवधारणा और अभ्यास का विस्तार सभी वेदों में, और फिर उपनिषदों और अन्य शास्त्रीय ग्रंथों में हुआ है।@techbkworld.blogspot.com

Yoga se apni bimariyon ko dur Karen

Dr BRIJESH MISHRA  योग एक प्राचीन अभ्यास है जो शरीर, श्वास और मन को जोड़ता है। यह शारीरिक आसन, श्वास अभ्यास (प्राणायाम) और ध्यान का उपयोग करके समग्र स्वास्थ्य में सुधार करता है। यह मानना कि योग से सभी बीमारियों को पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है, एक अतिशयोक्ति हो सकती है, लेकिन वैज्ञानिक शोधों से यह साबित हुआ है कि योग कई बीमारियों की रोकथाम, प्रबंधन और लक्षणों को कम करने में अत्यधिक प्रभावी है। यहां बताया गया है कि योग विभिन्न बीमारियों में कैसे मदद करता है: 1. शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार:  * लचीलापन और शक्ति: योग के आसन मांसपेशियों को फैलाने और मजबूत करने, लचीलेपन को बढ़ाने और संतुलन में सुधार करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। यह चोटों के जोखिम को कम करता है और समग्र शारीरिक संरेखण को बेहतर बनाता है।  * हृदय स्वास्थ्य: नियमित योग अभ्यास तनाव और शरीर में सूजन के स्तर को कम करके हृदय को स्वस्थ रखता है। यह उच्च रक्तचाप और अतिरिक्त वजन जैसे हृदय रोग के जोखिम वाले कारकों को भी नियंत्रित करने में मदद करता है। प्राणायाम और आसन रक्त परिसंचरण को बढ़ाते हैं।  * श्वसन संबंधी वि...

History of yoga

 योग का इतिहास बहुत प्राचीन है और इसकी जड़ें हजारों साल पहले भारत में जमी हुई हैं। ऐसा माना जाता है कि योग सभ्यता की शुरुआत के साथ ही अस्तित्व में आ गया था। इसे केवल शारीरिक व्यायाम के रूप में नहीं, बल्कि मन, शरीर और आत्मा के बीच संतुलन और एकता स्थापित करने के एक आध्यात्मिक अनुशासन के रूप में देखा जाता है। यहां योग के इतिहास के मुख्य चरण दिए गए हैं: 1. प्रागैतिहासिक काल (Pre-Vedic Period - 2700 ईसा पूर्व से पहले):  * माना जाता है कि योग की उत्पत्ति सिंधु-सरस्वती घाटी सभ्यता (लगभग 2700 ईसा पूर्व) से जुड़ी है। इस सभ्यता के अवशेषों में ऐसी मुहरें और मूर्तियाँ मिली हैं, जिनमें योगिक मुद्राओं में बैठे हुए आकृतियाँ दर्शाई गई हैं।  * कुछ विद्वानों का मानना है कि योग, वैदिक काल से भी पहले का है और 'आदि योगी' (पहले योगी) के रूप में भगवान शिव को इसका जनक माना जाता है। 2. वैदिक काल (Vedic Period - 1500-500 ईसा पूर्व):  * 'योग' शब्द का पहला उल्लेख ऋग्वेद में मिलता है, जो सबसे प्राचीन वैदिक ग्रंथ है। वेदों में ध्यान, तपस्या और अनुष्ठानों का वर्णन है जो योगिक प्रथाओं के मूल तत्व म...

Main yoga

 भारतीय योगशास्त्र में योग के कई प्रकार बताए गए हैं। मुख्य रूप से निम्नलिखित प्रकारों को जाना जाता है:  * ज्ञान योग: यह आत्मज्ञान और आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करने पर केंद्रित है। इसमें विचारों की उन्नति और सत्य की खोज पर जोर दिया जाता है।  * कर्म योग: यह कर्मों में कुशलता लाने और निष्काम भाव से कर्म करने पर आधारित है। इसका अर्थ है फल की इच्छा के बिना अपने कर्तव्यों का पालन करना।  * भक्ति योग: यह ईश्वर के प्रति प्रेम, समर्पण और भक्ति पर केंद्रित है। इसमें भजन-कीर्तन, पूजा-पाठ और भावनात्मक जुड़ाव के माध्यम से परमात्मा से जुड़ने का प्रयास किया जाता है।  * राज योग: महर्षि पतंजलि द्वारा प्रतिपादित राज योग को अष्टांग योग भी कहा जाता है, क्योंकि इसके आठ अंग हैं:    * यम: अहिंसा, सत्य, अस्तेय (चोरी न करना), ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह (संग्रह न करना)।    * नियम: शौच (पवित्रता), संतोष, तप, स्वाध्याय (आत्म-अध्ययन) और ईश्वर प्राणिधान (ईश्वर के प्रति समर्पण)।    * आसन: शारीरिक मुद्राएं जो शरीर को स्थिर और स्वस्थ बनाती हैं।    * प्राणायाम: ...

Yoga ke Labh

 Dr BRIJESH MISHRA  योग एक प्राचीन अभ्यास है जिसके कई शारीरिक और मानसिक लाभ हैं। इसे अपनी दिनचर्या में शामिल करने से आपको कई तरह से फायदा हो सकता है: शारीरिक लाभ:  * लचीलापन, शक्ति और संतुलन में सुधार: योग के आसन मांसपेशियों को मजबूत करते हैं और लचीलेपन को बढ़ाते हैं, जिससे शरीर में बेहतर संतुलन और स्थिरता आती है।  * पीठ दर्द में राहत: योग पीठ के निचले हिस्से के दर्द को कम करने और गतिशीलता में सुधार करने में मदद करता है।  * गठिया के लक्षणों में कमी: हल्का योग गठिया से पीड़ित लोगों के जोड़ों के दर्द और सूजन को कम कर सकता है।  * हृदय स्वास्थ्य में सुधार: नियमित योग अभ्यास तनाव और पूरे शरीर में सूजन को कम करके हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करता है। यह उच्च रक्तचाप और अतिरिक्त वजन जैसे हृदय रोग के जोखिम कारकों को भी कम कर सकता है।  * वजन प्रबंधन: योग वजन कम करने और बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) को कम करने में सहायक हो सकता है।  * बेहतर मुद्रा और शरीर जागरूकता: योग सही मुद्रा और शरीर की जागरूकता को बढ़ावा देता है, जिससे चोटों का खतरा कम होता है। ...

Mahrshi Patanjali mein yog ke bare mein kya kaha

 Bk sir  महर्षि पतंजलि को योग दर्शन का प्रणेता माना जाता है। उन्होंने बिखरे हुए योग सूत्रों को एक व्यवस्थित रूप दिया और "योग सूत्र" नामक ग्रंथ की रचना की, जिसमें उन्होंने योग के गूढ़ रहस्यों को उजागर किया। पतंजलि के अनुसार, योग का मूल सिद्धांत है: "योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः" (योग सूत्र 1.2), जिसका अर्थ है चित्त की वृत्तियों (मन की चंचल अवस्थाओं) का निरोध (रोकना) ही योग है। इसे और विस्तार से समझें:  * चित्त: यह मन, बुद्धि, अहंकार और चेतना का सम्मिलित रूप है।  * वृत्तियां: ये मन में उठने वाले विचार, भावनाएं, कल्पनाएं और संस्कार हैं जो हमें बाहरी दुनिया में भटकाते रहते हैं।  * निरोध: इन वृत्तियों को शांत करना, स्थिर करना और उन्हें एकाग्र करना। जब चित्त की वृत्तियाँ शांत हो जाती हैं, तो व्यक्ति अपने वास्तविक स्वरूप में स्थित हो जाता है। पतंजलि कहते हैं: "तदा द्रष्टुः स्वरूपेऽवस्थानम्" (योग सूत्र 1.3), अर्थात तब दृष्टा (आत्मा) अपने स्वरूप में स्थित हो जाता है। पतंजलि ने योग को प्राप्त करने के लिए "अष्टांग योग" (योग के आठ अंग) का विस्तृत वर्णन किया है, जो...

International yoga day Antrashtriy Yuva Divas 21 June i

  Bk sir   Here's an article for Antarrashtriya Yoga Diwas on June 21, 2025: अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2025: एक वैश्विक आह्वान, एक स्वस्थ जीवन की ओर हर साल 21 जून को, दुनिया भर में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस बड़े उत्साह और समर्पण के साथ मनाया जाता है। 2025 में भी, यह दिन एक बार फिर हमें योग के प्राचीन विज्ञान के अनमोल लाभों को अपनाने और अपने जीवन में शांति, सद्भाव और स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित करेगा। योग: केवल आसन नहीं, एक जीवन शैली योग को अक्सर केवल शारीरिक आसनों तक सीमित कर दिया जाता है, लेकिन यह इससे कहीं अधिक है। योग एक समग्र विज्ञान है जो शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करने पर केंद्रित है। इसमें आसन (शारीरिक मुद्राएं), प्राणायाम (श्वास नियंत्रण), ध्यान (मेडिटेशन) और यम-नियम (नैतिक सिद्धांत) जैसे विभिन्न पहलू शामिल हैं। योग का अभ्यास हमें आंतरिक शांति प्राप्त करने, तनाव कम करने, शारीरिक शक्ति और लचीलेपन को बढ़ाने और मानसिक स्पष्टता विकसित करने में मदद करता है। 2025 का विशेष महत्व जैसे-जैसे दुनिया तेजी से बदल रही है, आधुनिक जीवन शैली के दबाव और तनाव बढ़ते ज...