Bhartiya yog kitne prakar ke Hain
भारतीय योगशास्त्र में योग के कई प्रकार बताए गए हैं। मुख्य रूप से निम्नलिखित प्रकारों को जाना जाता है: * ज्ञान योग: यह आत्मज्ञान और आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करने पर केंद्रित है। इसमें विचारों की उन्नति और सत्य की खोज पर जोर दिया जाता है। * कर्म योग: यह कर्मों में कुशलता लाने और निष्काम भाव से कर्म करने पर आधारित है। इसका अर्थ है फल की इच्छा के बिना अपने कर्तव्यों का पालन करना। * भक्ति योग: यह ईश्वर के प्रति प्रेम, समर्पण और भक्ति पर केंद्रित है। इसमें भजन-कीर्तन, पूजा-पाठ और भावनात्मक जुड़ाव के माध्यम से परमात्मा से जुड़ने का प्रयास किया जाता है। * राज योग: महर्षि पतंजलि द्वारा प्रतिपादित राज योग को अष्टांग योग भी कहा जाता है, क्योंकि इसके आठ अंग हैं: * यम: अहिंसा, सत्य, अस्तेय (चोरी न करना), ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह (संग्रह न करना)। * नियम: शौच (पवित्रता), संतोष, तप, स्वाध्याय (आत्म-अध्ययन) और ईश्वर प्राणिधान (ईश्वर के प्रति समर्पण)। * आसन: शारीरिक मुद्राएं जो शरीर को स्थिर और स्वस्थ बनाती हैं। * प्राणायाम: ...