योग विद्या का मूल स्रोत वेद है
BRIJESH sir
योग विद्या का मूल स्रोत वेद हैं। योग का सबसे पहला उल्लेख ऋग्वेद में मिलता है। इसके अलावा, यजुर्वेद और अथर्ववेद में भी योग से संबंधित मंत्र और अवधारणाएं मिलती हैं।
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि वेदों में योग का उल्लेख शुरुआती रूप में है, जहां यह मुख्य रूप से ध्यान, एकाग्रता और आंतरिक अनुशासन के रूप में वर्णित है। बाद के उपनिषदों, जैसे कठोपनिषद, और फिर पतंजलि के योगसूत्र में योग को एक अधिक व्यवस्थित और विस्तृत दर्शन के रूप में विकसित किया गया।
तो, अगर कोई एक वेद पूछा जाए, तो ऋग्वेद सबसे पहला है जहाँ "योग" शब्द का उल्लेख मिलता है, लेकिन योग की अवधारणा और अभ्यास का विस्तार सभी वेदों में, और फिर उपनिषदों और अन्य शास्त्रीय ग्रंथों में हुआ है।@techbkworld.blogspot.com
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