Mahrshi Patanjali mein yog ke bare mein kya kaha

 Bk sir 

महर्षि पतंजलि को योग दर्शन का प्रणेता माना जाता है। उन्होंने बिखरे हुए योग सूत्रों को एक व्यवस्थित रूप दिया और "योग सूत्र" नामक ग्रंथ की रचना की, जिसमें उन्होंने योग के गूढ़ रहस्यों को उजागर किया।

पतंजलि के अनुसार, योग का मूल सिद्धांत है: "योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः" (योग सूत्र 1.2), जिसका अर्थ है चित्त की वृत्तियों (मन की चंचल अवस्थाओं) का निरोध (रोकना) ही योग है।

इसे और विस्तार से समझें:

 * चित्त: यह मन, बुद्धि, अहंकार और चेतना का सम्मिलित रूप है।

 * वृत्तियां: ये मन में उठने वाले विचार, भावनाएं, कल्पनाएं और संस्कार हैं जो हमें बाहरी दुनिया में भटकाते रहते हैं।

 * निरोध: इन वृत्तियों को शांत करना, स्थिर करना और उन्हें एकाग्र करना।

जब चित्त की वृत्तियाँ शांत हो जाती हैं, तो व्यक्ति अपने वास्तविक स्वरूप में स्थित हो जाता है। पतंजलि कहते हैं: "तदा द्रष्टुः स्वरूपेऽवस्थानम्" (योग सूत्र 1.3), अर्थात तब दृष्टा (आत्मा) अपने स्वरूप में स्थित हो जाता है।

पतंजलि ने योग को प्राप्त करने के लिए "अष्टांग योग" (योग के आठ अंग) का विस्तृत वर्णन किया है, जो आत्म-साक्षात्कार के लक्ष्य की ओर ले जाता है:

 * यम (सामाजिक कर्तव्य): अहिंसा, सत्य, अस्तेय (चोरी न करना), ब्रह्मचर्य (संयम) और अपरिग्रह (संग्रह न करना)।

 * नियम (व्यक्तिगत नियम): शौच (शुद्धि), संतोष, तप (तपस्या), स्वाध्याय (आत्म-अध्ययन) और ईश्वर प्राणिधान (ईश्वर के प्रति समर्पण)।

 * आसन (शारीरिक मुद्राएं): शरीर को स्थिर और आरामदायक स्थिति में रखना, जिससे ध्यान में आसानी हो।

 * प्राणायाम (श्वास नियंत्रण): श्वास को नियंत्रित करके प्राण ऊर्जा को संतुलित करना।

 * प्रत्याहार (इंद्रियों को वापस लेना): इंद्रियों को बाहरी विषयों से हटाकर अंतर्मुखी करना।

 * धारणा (मन की एकाग्रता): चित्त को एक बिंदु या वस्तु पर केंद्रित करना।

 * ध्यान (ध्यान): केंद्रित चित्त को लगातार एक ही वस्तु पर बनाए रखना, जिससे गहन एकाग्रता प्राप्त हो।

 * समाधि (अवशोषण या स्थिरता): वह अवस्था जब व्यक्ति अपने ध्येय में पूरी तरह लीन हो जाता है और स्वयं के अस्तित्व का भान नहीं रहता। यह योग की चरम अवस्था है।

संक्षेप में, महर्षि पतंजलि ने योग को केवल शारीरिक व्यायाम नहीं माना, बल्कि इसे मन, शरीर और आत्मा के सामंजस्य का एक वैज्ञानिक और व्यवस्थित मार्ग बताया, जिसका अंतिम लक्ष्य आत्मज्ञान और मोक्ष की प्राप्ति है। Techbkworld.blogspot.com


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गांधीजी समेत सभी बड़े नेताओं की गिरफ्तारी के बाद पूरे देश में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। बलिया में भी छात्रों और युवाओं ने ब्रिटिश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। * मांगों का दबाव: स्थानीय नेताओं के नेतृत्व में हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए। उन्होंने सरकारी दफ्तरों, थानों और जेलों पर कब्जा करने की योजना बनाई। उनकी मुख्य मांग थी कि बलिया के सभी राजनैतिक कैदियों को तुरंत रिहा किया जाए। * 19 अगस्त 1942 की ऐतिहासिक घटना: 19 अगस्त को, बलिया के जिला कारागार के बाहर 50,000 से अधिक लोगों की भीड़ जमा हो गई। उन्होंने जेल का गेट तोड़कर सभी कैदियों को रिहा कर दिया। इस घटना ने ब्रिटिश अधिकारियों को हिला दिया। * समानांतर सरकार की स्थापना: इस विद्रोह का नेतृत्व कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता चित्तू पांडे ने किया। जनता के भारी दबाव और विद्रोह को देखते हुए, तत्कालीन ब्रिटिश कलेक्टर जे. सी. निक्सन को झुकना पड़ा और उसने चित्तू पांडे को बलिया का नया जिलाधिकारी (Magistrate) घोषित कर दिया। इसी के साथ, बलिया ने खुद को आजाद घोषित कर दिया और एक समानांतर सरकार (Parallel Government) की स्थापना की गई। * 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CONGRATULATIONS TO VC UPENDRA SINGH

15 August ko ध्वजा रोहड़ FLAG HOSTING AND 26 JAN KO FLAG UNFURLING झंडा फहराना कहा जाता है