Yoga se apni bimariyon ko dur Karen

Dr BRIJESH MISHRA 

योग एक प्राचीन अभ्यास है जो शरीर, श्वास और मन को जोड़ता है। यह शारीरिक आसन, श्वास अभ्यास (प्राणायाम) और ध्यान का उपयोग करके समग्र स्वास्थ्य में सुधार करता है। यह मानना कि योग से सभी बीमारियों को पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है, एक अतिशयोक्ति हो सकती है, लेकिन वैज्ञानिक शोधों से यह साबित हुआ है कि योग कई बीमारियों की रोकथाम, प्रबंधन और लक्षणों को कम करने में अत्यधिक प्रभावी है।

यहां बताया गया है कि योग विभिन्न बीमारियों में कैसे मदद करता है:

1. शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार:

 * लचीलापन और शक्ति: योग के आसन मांसपेशियों को फैलाने और मजबूत करने, लचीलेपन को बढ़ाने और संतुलन में सुधार करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। यह चोटों के जोखिम को कम करता है और समग्र शारीरिक संरेखण को बेहतर बनाता है।

 * हृदय स्वास्थ्य: नियमित योग अभ्यास तनाव और शरीर में सूजन के स्तर को कम करके हृदय को स्वस्थ रखता है। यह उच्च रक्तचाप और अतिरिक्त वजन जैसे हृदय रोग के जोखिम वाले कारकों को भी नियंत्रित करने में मदद करता है। प्राणायाम और आसन रक्त परिसंचरण को बढ़ाते हैं।

 * श्वसन संबंधी विकार: प्राणायाम फेफड़ों के कार्य और श्वसन दक्षता में सुधार करता है। यह श्वसन मांसपेशियों को मजबूत करता है और ऑक्सीजन के सेवन को बढ़ाता है। अस्थमा और सीओपीडी जैसी पुरानी श्वसन स्थितियों के लक्षणों को कम करने में यह सहायक है।

 * मधुमेह: योग इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार और रक्त शर्करा के स्तर को कम करके मधुमेह के प्रबंधन और रोकथाम में मदद करता है। सूर्य नमस्कार और धनुरासन जैसे आसन अग्न्याशय को उत्तेजित करते हैं, जिससे इंसुलिन उत्पादन में वृद्धि होती है।

 * मोटापा: योग शारीरिक गतिविधि, सचेत खान-पान और तनाव में कमी के संयोजन के माध्यम से वजन प्रबंधन के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण प्रदान करता है।

 * पीठ और जोड़ों का दर्द: योग पीठ के निचले हिस्से के दर्द और गठिया के लक्षणों को कम करने में प्रभावी है। बिल्ली-गाय मुद्रा (Cat-Cow Pose) और अन्य स्ट्रेचिंग आसन पीठ की मांसपेशियों को मजबूत और लचीला बनाते हैं।

 * पाचन समस्याएं: कुछ योग आसन पाचन तंत्र को उत्तेजित करते हैं और कब्ज और अपच जैसी समस्याओं में मदद करते हैं।

2. मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य में सुधार:

 * तनाव और चिंता: योग विश्राम को बढ़ावा देने और तनाव के स्तर को कम करने की अपनी क्षमता के लिए सबसे प्रसिद्ध है। नियंत्रित श्वास (प्राणायाम) और दिमागीपन तकनीकें मन को शांत करने, कोर्टिसोल (तनाव हार्मोन) के स्तर को कम करने और गहरी छूट की स्थिति उत्पन्न करने में मदद करती हैं। यह चिंता और अवसाद के लक्षणों को काफी कम कर सकता है।

 * बेहतर नींद: योग विश्राम को बढ़ावा देता है और तनाव को कम करता है, जिससे यह नींद की गुणवत्ता में सुधार के लिए एक प्रभावी प्राकृतिक उपचार बन जाता है। कुछ योग आसन और विश्राम तकनीकें नींद-जागने के चक्र को विनियमित करने और अनिद्रा के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकती हैं।

 * मानसिक स्पष्टता और ध्यान: योग दिमागीपन और वर्तमान क्षण की जागरूकता को प्रोत्साहित करता है, जो मानसिक स्पष्टता, एकाग्रता और ध्यान को बढ़ाता है। नियमित अभ्यास संज्ञानात्मक कार्य को तेज कर सकता है और दैनिक चुनौतियों के बीच मानसिक शांति की भावना को बढ़ावा दे सकता है।

 * मूड और आत्मविश्वास: योग एंडोर्फिन (शरीर के प्राकृतिक मूड लिफ्टर) को छोड़ता है और आत्म-विश्वास और शरीर की छवि में सुधार करता है।

3. प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा:

 * शारीरिक व्यायाम, तनाव में कमी और योग के माध्यम से रक्त परिसंचरण में सुधार प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत कर सकता है। योग प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को बढ़ाता है और सूजन को कम करता है।

कैसे काम करता है योग?

 * आसन (शारीरिक मुद्राएं): ये शरीर की मांसपेशियों, जोड़ों, हड्डियों और आंतरिक अंगों पर काम करते हैं, जिससे उनकी कार्यक्षमता में सुधार होता है।

 * प्राणायाम (श्वास नियंत्रण): श्वास को नियंत्रित करने से शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह बढ़ता है, तंत्रिका तंत्र शांत होता है, और ऊर्जा का स्तर बढ़ता है।

 * ध्यान (Meditation): ध्यान मन को शांत करता है, तनाव हार्मोन को कम करता है, और मानसिक स्पष्टता और भावनात्मक संतुलन को बढ़ावा देता है।

महत्वपूर्ण विचार:

 * पूरक चिकित्सा: योग को पारंपरिक चिकित्सा उपचारों के पूरक के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि उनके विकल्प के रूप में। यदि आपको कोई गंभीर बीमारी है, तो हमेशा डॉक्टर से सलाह लें।

 * सही मार्गदर्शन: एक योग्य और अनुभवी योग शिक्षक के मार्गदर्शन में योग का अभ्यास करना महत्वपूर्ण है, खासकर यदि आपको कोई स्वास्थ्य समस्या है। वे आपकी स्थिति के अनुसार सही आसन और प्राणायाम सुझा सकते हैं।

 * निरंतरता: योग के पूर्ण लाभ प्राप्त करने के लिए नियमित और निरंतर अभ्यास आवश्यक है।

संक्षेप में, योग एक समग्र दृष्टिकोण प्रदान करता है जो शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है। यह कई बीमारियों को रोकने, उनके लक्षणों को कम करने और जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने में मदद कर सकता है, लेकिन यह दावा करना सही नहीं है कि यह सभी बीमारियों को "दूर" कर सकता है। यह एक शक्तिशाली उपकरण है जो शरीर की अपनी उपचार क्षमताओं को बढ़ावा देता है और समग्र कल्याण को बढ़ाता है।@Techbkworld.blogspot.com


Comments

Popular posts from this blog

बागी बलिया का गौरवशाली इतिहास: विद्रोह, त्याग और बलिदान की गाथा बलिया... एक ऐसा नाम जो सुनते ही हर भारतीय के मन में साहस, स्वाभिमान और क्रांति की एक अमिट तस्वीर उभर आती है। यह सिर्फ एक जिला नहीं, बल्कि एक पहचान है – एक ऐसी पहचान जिसने इसे "बागी बलिया" का गौरवपूर्ण विशेषण दिया। गंगा और घाघरा (सरयू) जैसी पवित्र नदियों के संगम पर स्थित यह भूमि सदियों से ऋषि-मुनियों की तपस्थली और क्रांतिकारियों के लिए प्रेरणास्रोत रही है। इसका इतिहास सिर्फ विद्रोह का नहीं, बल्कि ज्ञान, अध्यात्म और संस्कृति का भी है। आइए, बलिया के गौरवशाली इतिहास को विस्तार से जानते हैं, जिसके पन्ने त्याग और बलिदान की कहानियों से भरे हुए हैं। प्राचीन काल: ऋषियों की भूमि बलिया का इतिहास इतना पुराना है कि यह पौराणिक कथाओं और वैदिक काल से जुड़ा हुआ है। माना जाता है कि इस पवित्र भूमि पर कई महान ऋषियों ने तपस्या की। * भृगु मुनि: बलिया का नाम सबसे प्रमुख रूप से महर्षि भृगु से जुड़ा है। उन्होंने इसी भूमि पर अपना आश्रम स्थापित किया था, जो आज भी भृगु मुनि मंदिर के रूप में मौजूद है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, उन्होंने भगवान विष्णु की छाती पर लात मारकर उनकी परीक्षा ली थी, जिससे उनकी सहिष्णुता और उदारता का पता चला। * वाल्मीकि और जमदग्नि: यह क्षेत्र रामायण काल से भी जुड़ा हुआ है। ऐसी मान्यता है कि महर्षि वाल्मीकि का आश्रम भी इसी के आस-पास था। इसके अलावा, ऋषि जमदग्नि की कर्मभूमि भी यही मानी जाती है। * ददरी मेला: बलिया का प्रसिद्ध ददरी मेला, जो भारत के सबसे बड़े पशु मेलों में से एक है, इसी प्राचीन विरासत का प्रतीक है। इसका नामकरण महान ददर मुनि के नाम पर हुआ था, जिनका आश्रम गंगा और सरयू के संगम पर था। इस तरह, बलिया ने प्राचीन काल से ही आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना का केंद्र बनने का गौरव प्राप्त किया। मध्यकालीन इतिहास: साम्राज्यों का हिस्सा मध्यकाल में बलिया बड़े-बड़े साम्राज्यों का हिस्सा रहा, लेकिन इसकी पहचान एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक या सैन्य केंद्र के रूप में नहीं बन पाई। यह दिल्ली सल्तनत और बाद में मुगल साम्राज्य के तहत आने वाले जौनपुर सल्तनत का हिस्सा था। इस दौरान यहाँ कई छोटे-बड़े रजवाड़े और जमींदारियां उभरीं। गंगा और सरयू नदियों के किनारे होने के कारण यह व्यापार और कृषि का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गया था। इस दौर में यहाँ विभिन्न समुदायों का आगमन हुआ, जिससे यहाँ की संस्कृति और सामाजिक ताना-बाना और भी समृद्ध हुआ। ब्रिटिश शासन और 'बागी बलिया' का उदय बलिया के इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण और क्रांतिकारी अध्याय ब्रिटिश राज के दौरान लिखा गया। जहाँ पूरे देश में आजादी की लड़ाई चल रही थी, वहीं बलिया में यह आंदोलन एक अलग ही रूप ले चुका था। यहाँ के लोगों में ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ एक गहरा रोष था, जो 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से लेकर 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन तक हर कदम पर दिखाई दिया। यह कहानी सिर्फ एक घटना की नहीं, बल्कि एक मिट्टी के स्वाभिमान की है। यहाँ के किसानों और युवाओं ने हमेशा ब्रिटिश सरकार की दमनकारी नीतियों, खासकर भू-राजस्व व्यवस्था (Land Revenue System) का खुलकर विरोध किया। 1942: जब बलिया ने खुद को आजाद घोषित किया आजादी की लड़ाई में बलिया का नाम हमेशा 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन (Quit India Movement) से जुड़ा रहेगा। महात्मा गांधी ने जब "करो या मरो" का नारा दिया, तो पूरे देश में क्रांति की लहर दौड़ गई, लेकिन बलिया में इस आंदोलन ने एक अभूतपूर्व रूप ले लिया। * विद्रोह की शुरुआत: 9 अगस्त 1942 को गांधीजी समेत सभी बड़े नेताओं की गिरफ्तारी के बाद पूरे देश में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। बलिया में भी छात्रों और युवाओं ने ब्रिटिश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। * मांगों का दबाव: स्थानीय नेताओं के नेतृत्व में हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए। उन्होंने सरकारी दफ्तरों, थानों और जेलों पर कब्जा करने की योजना बनाई। उनकी मुख्य मांग थी कि बलिया के सभी राजनैतिक कैदियों को तुरंत रिहा किया जाए। * 19 अगस्त 1942 की ऐतिहासिक घटना: 19 अगस्त को, बलिया के जिला कारागार के बाहर 50,000 से अधिक लोगों की भीड़ जमा हो गई। उन्होंने जेल का गेट तोड़कर सभी कैदियों को रिहा कर दिया। इस घटना ने ब्रिटिश अधिकारियों को हिला दिया। * समानांतर सरकार की स्थापना: इस विद्रोह का नेतृत्व कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता चित्तू पांडे ने किया। जनता के भारी दबाव और विद्रोह को देखते हुए, तत्कालीन ब्रिटिश कलेक्टर जे. सी. निक्सन को झुकना पड़ा और उसने चित्तू पांडे को बलिया का नया जिलाधिकारी (Magistrate) घोषित कर दिया। इसी के साथ, बलिया ने खुद को आजाद घोषित कर दिया और एक समानांतर सरकार (Parallel Government) की स्थापना की गई। * मात्र 13 दिनों की आजादी: बलिया ने लगभग 13 दिनों तक ब्रिटिश राज से मुक्त रहकर अपनी खुद की सरकार चलाई। यह भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में एक अनूठी और अद्भुत घटना थी। * अंग्रेजों का दमन: हालाँकि, यह स्वतंत्रता बहुत कम समय के लिए ही रही। 13 दिनों बाद ब्रिटिश सेना ने भारी संख्या में बलिया पर हमला किया। इस हमले में कई निर्दोष लोग मारे गए और समानांतर सरकार को कुचल दिया गया। चित्तू पांडे और उनके साथियों को गिरफ्तार कर लिया गया और उन पर भयानक अत्याचार किए गए। लेकिन इस घटना ने बलिया को "बागी" होने का सम्मान दिला दिया। आजादी के बाद का बलिया 1947 में भारत को आजादी मिलने के बाद भी बलिया का योगदान जारी रहा। यहाँ की मिट्टी ने कई महान व्यक्तित्वों को जन्म दिया, जिन्होंने देश और समाज के लिए महत्वपूर्ण काम किए। * मंगल पांडे: हालाँकि, सिपाही मंगल पांडे का जन्म बलिया से सटे नगवा गांव (बलिया और गाजीपुर की सीमा पर) में हुआ था, लेकिन उनके क्रांतिकारी चरित्र को अक्सर बागी बलिया की भावना से जोड़ा जाता है। * जयप्रकाश नारायण: लोकनायक जयप्रकाश नारायण, जिन्होंने 1970 के दशक में संपूर्ण क्रांति का नारा दिया, उनका जन्म भी बलिया के सिताबदियारा गांव में हुआ था। उन्होंने देश की राजनीति और समाज पर गहरा प्रभाव डाला। * साहित्य और कला: बलिया की धरती ने कई लेखकों, कवियों और कलाकारों को भी जन्म दिया है, जिन्होंने अपनी रचनाओं से भोजपुरी और हिंदी साहित्य को समृद्ध किया है। आज बलिया अपनी उपजाऊ भूमि, मेहनती किसानों और गंगा-सरयू की गोद में बसी संस्कृति के लिए जाना जाता है। लेकिन इसकी सबसे बड़ी पहचान वही है जो इसने आजादी की लड़ाई में अर्जित की थी – "बागी बलिया"। यह नाम सिर्फ विद्रोह का प्रतीक नहीं, बल्कि साहस, बलिदान और स्वाभिमान की एक ऐसी विरासत है, जो यहाँ की हर पीढ़ी को गर्व से जीने की प्रेरणा देती है।

CONGRATULATIONS TO VC UPENDRA SINGH

15 August ko ध्वजा रोहड़ FLAG HOSTING AND 26 JAN KO FLAG UNFURLING झंडा फहराना कहा जाता है