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सैनिक स्कूल की तैयारी कैसे करें?

 सैनिक स्कूल में प्रवेश के लिए दो कक्षाओं - कक्षा 6 और कक्षा 9 - के लिए अलग-अलग पाठ्यक्रम होता है। दोनों कक्षाओं के लिए लिखित परीक्षा होती है जिसमें बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) पूछे जाते हैं। कक्षा 6 के लिए सिलेबस: कक्षा 6 की प्रवेश परीक्षा में कुल 125 प्रश्न होते हैं और यह 300 अंकों की होती है। इसमें CBSE कक्षा 5वीं स्तर तक का सिलेबस पूछा जाता है। मुख्य विषय इस प्रकार हैं:  * गणित (Mathematics): 50 प्रश्न (150 अंक)। इसमें प्राकृतिक संख्याएँ, LCM और HCF, यूनिटरी मेथड, भिन्न, अनुपात और समानुपात, लाभ और हानि, सरलीकरण, औसत, प्रतिशत, क्षेत्रफल और परिधि, साधारण ब्याज, रेखाएँ और कोण, तापमान, इकाइयों का रूपांतरण, रोमन अंक, कोणों के प्रकार, वृत्त, घन और घनाभ का आयतन, अभाज्य और भाज्य संख्याएँ, समतल आकृतियाँ, दशमलव संख्याएँ, गति और समय, संख्याओं पर संक्रियाएँ, पूरक और संपूरक कोण, भिन्नों का क्रम, आदि शामिल हैं। Bk Sir   * सामान्य ज्ञान (General Knowledge): 25 प्रश्न (50 अंक)। इसमें विज्ञान और सामाजिक अध्ययन से संबंधित प्रश्न होते हैं। इसमें भारत के राज्य, भारत के बारे में महत्वपू...

What is the role of VC विश्वविद्यालय के कुलपति की भूमिका कैसी होनी चाहिए?

 विश्वविद्यालय के कुलपति की भूमिका  विश्वविद्यालय के कुलपति (वाइस चांसलर) की भूमिका विश्वविद्यालय के समग्र विकास और सुचारू संचालन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। उनकी भूमिका केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि अकादमिक नेतृत्व, वित्तीय प्रबंधन, शोध को बढ़ावा देने और विश्वविद्यालय को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाली होनी चाहिए। यहाँ कुछ प्रमुख भूमिकाएँ दी गई हैं जो विश्वविद्यालय के कुलपति को निभानी चाहिए: 1. अकादमिक नेतृत्व और उत्कृष्टता  * शैक्षणिक गुणवत्ता सुनिश्चित करना: कुलपति को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि विश्वविद्यालय में प्रदान की जाने वाली शिक्षा उच्च गुणवत्ता वाली हो। इसमें पाठ्यक्रम को अद्यतन करना, प्रभावी शिक्षण-अधिगम प्रक्रियाओं को बढ़ावा देना और छात्रों के लिए सर्वोत्तम सीखने का माहौल बनाना शामिल है।  * नवाचार और अनुसंधान को बढ़ावा देना: उन्हें विश्वविद्यालय में अनुसंधान और नवाचार की संस्कृति को बढ़ावा देना चाहिए। इसके लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना, संकाय सदस्यों को शोध के लिए प्रोत्साहित करना और राष्ट्रीय/अंतर्राष्ट्रीय सहयोग स्थापित करना महत्वपूर्ण है। Bk Sir ...

CONGRATULATIONS TO VC UPENDRA SINGH

 #BKSIR प्राचार्य से कुलपति बने उपेंद्र सिंह को हार्दिक बधाई! यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि आदरणीय प्रोफेसर उपेंद्र सिंह जी, जो अब तक एक सफल प्राचार्य के रूप में अपनी सेवाएँ दे रहे थे, अब उन्हें कुलपति (Vice Chancellor) जैसे गरिमामयी पद पर नियुक्त किया गया है। यह उपलब्धि न केवल उनके व्यक्तिगत समर्पण, कड़ी मेहनत और अकादमिक उत्कृष्टता का प्रमाण है, बल्कि उस संस्थान के लिए भी गौरव का क्षण है जहाँ उन्होंने अपना अमूल्य योगदान दिया है। प्रोफेसर उपेंद्र सिंह जी का प्राचार्य के रूप में कार्यकाल हमेशा प्रेरणादायक रहा है। उनके नेतृत्व में संस्थान ने शिक्षा, अनुसंधान और प्रशासनिक कार्यों में अभूतपूर्व प्रगति की। उन्होंने हमेशा छात्रों और शिक्षकों के कल्याण को प्राथमिकता दी, एक ऐसा वातावरण निर्मित किया जहाँ सीखने और नवाचार को बढ़ावा मिले। उनकी दूरदर्शिता, नवाचार और छात्र-केंद्रित दृष्टिकोण ने अनगिनत छात्रों के जीवन को सकारात्मक रूप से प्रभावित किया है। अब कुलपति के रूप में उनकी नई भूमिका उन्हें और भी बड़े स्तर पर शिक्षा जगत में महत्वपूर्ण बदलाव लाने का अवसर प्रदान करेगी। हमें पूर्ण विश्वास है क...

किताब कैसे लिखे How to write book

मैं आपको एक ऐसी किताब का खाका दे रहा हूँ जो आपको प्रेरित कर सकती है और शायद आपकी अपनी किताब लिखने की यात्रा में एक शुरुआती बिंदु बन सकती है। प्रेरणा की राह: असीमित संभावनाओं का अनावरण प्रस्तावना: जागरण का आह्वान  * उद्देश्य: यह किताब क्यों महत्वपूर्ण है? यह पाठक को क्या देगी?  * व्यक्तिगत यात्रा का परिचय (संक्षिप्त): लेखक की अपनी प्रेरणा यात्रा का एक छोटा सा अंश, ताकि पाठक जुड़ाव महसूस कर सकें।  * किताब का वादा: यह किताब आपको अपनी आंतरिक शक्ति को पहचानने और उसे प्रयोग करने में कैसे मदद करेगी। अध्याय 1: अपनी चिंगारी को पहचानें  * आपकी अद्वितीयता: हर व्यक्ति विशेष है। अपनी खूबियों और कमजोरियों को समझना।  * लक्ष्य निर्धारण का महत्व: बिना लक्ष्य के दिशाहीनता। छोटे और बड़े लक्ष्यों को कैसे निर्धारित करें।  * स्वयं-विश्वास की नींव: अपनी क्षमताओं पर विश्वास करना क्यों ज़रूरी है। संदेह को कैसे दूर करें।  * प्रेरणादायक अंश: "आपकी असली शक्ति आपके अंदर छिपी है। उसे पहचानने का साहस करें।" अध्याय 2: बाधाओं से परे: चुनौतियाँ और समाधान  * असफलता का नया दृष्टिकोण...

Bhartiya yog kitne prakar ke Hain

 भारतीय योगशास्त्र में योग के कई प्रकार बताए गए हैं। मुख्य रूप से निम्नलिखित प्रकारों को जाना जाता है:  * ज्ञान योग: यह आत्मज्ञान और आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करने पर केंद्रित है। इसमें विचारों की उन्नति और सत्य की खोज पर जोर दिया जाता है।  * कर्म योग: यह कर्मों में कुशलता लाने और निष्काम भाव से कर्म करने पर आधारित है। इसका अर्थ है फल की इच्छा के बिना अपने कर्तव्यों का पालन करना।  * भक्ति योग: यह ईश्वर के प्रति प्रेम, समर्पण और भक्ति पर केंद्रित है। इसमें भजन-कीर्तन, पूजा-पाठ और भावनात्मक जुड़ाव के माध्यम से परमात्मा से जुड़ने का प्रयास किया जाता है।  * राज योग: महर्षि पतंजलि द्वारा प्रतिपादित राज योग को अष्टांग योग भी कहा जाता है, क्योंकि इसके आठ अंग हैं:    * यम: अहिंसा, सत्य, अस्तेय (चोरी न करना), ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह (संग्रह न करना)।    * नियम: शौच (पवित्रता), संतोष, तप, स्वाध्याय (आत्म-अध्ययन) और ईश्वर प्राणिधान (ईश्वर के प्रति समर्पण)।    * आसन: शारीरिक मुद्राएं जो शरीर को स्थिर और स्वस्थ बनाती हैं।    * प्राणायाम: ...

योग विद्या का मूल स्रोत वेद है

 BRIJESH sir  योग विद्या का मूल स्रोत वेद हैं। योग का सबसे पहला उल्लेख ऋग्वेद में मिलता है। इसके अलावा, यजुर्वेद और अथर्ववेद में भी योग से संबंधित मंत्र और अवधारणाएं मिलती हैं। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि वेदों में योग का उल्लेख शुरुआती रूप में है, जहां यह मुख्य रूप से ध्यान, एकाग्रता और आंतरिक अनुशासन के रूप में वर्णित है। बाद के उपनिषदों, जैसे कठोपनिषद, और फिर पतंजलि के योगसूत्र में योग को एक अधिक व्यवस्थित और विस्तृत दर्शन के रूप में विकसित किया गया। तो, अगर कोई एक वेद पूछा जाए, तो ऋग्वेद सबसे पहला है जहाँ "योग" शब्द का उल्लेख मिलता है, लेकिन योग की अवधारणा और अभ्यास का विस्तार सभी वेदों में, और फिर उपनिषदों और अन्य शास्त्रीय ग्रंथों में हुआ है।@techbkworld.blogspot.com

Yoga se apni bimariyon ko dur Karen

Dr BRIJESH MISHRA  योग एक प्राचीन अभ्यास है जो शरीर, श्वास और मन को जोड़ता है। यह शारीरिक आसन, श्वास अभ्यास (प्राणायाम) और ध्यान का उपयोग करके समग्र स्वास्थ्य में सुधार करता है। यह मानना कि योग से सभी बीमारियों को पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है, एक अतिशयोक्ति हो सकती है, लेकिन वैज्ञानिक शोधों से यह साबित हुआ है कि योग कई बीमारियों की रोकथाम, प्रबंधन और लक्षणों को कम करने में अत्यधिक प्रभावी है। यहां बताया गया है कि योग विभिन्न बीमारियों में कैसे मदद करता है: 1. शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार:  * लचीलापन और शक्ति: योग के आसन मांसपेशियों को फैलाने और मजबूत करने, लचीलेपन को बढ़ाने और संतुलन में सुधार करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। यह चोटों के जोखिम को कम करता है और समग्र शारीरिक संरेखण को बेहतर बनाता है।  * हृदय स्वास्थ्य: नियमित योग अभ्यास तनाव और शरीर में सूजन के स्तर को कम करके हृदय को स्वस्थ रखता है। यह उच्च रक्तचाप और अतिरिक्त वजन जैसे हृदय रोग के जोखिम वाले कारकों को भी नियंत्रित करने में मदद करता है। प्राणायाम और आसन रक्त परिसंचरण को बढ़ाते हैं।  * श्वसन संबंधी वि...