सैनिक स्कूल की तैयारी कैसे करें?

 सैनिक स्कूल में प्रवेश के लिए दो कक्षाओं - कक्षा 6 और कक्षा 9 - के लिए अलग-अलग पाठ्यक्रम होता है। दोनों कक्षाओं के लिए लिखित परीक्षा होती है जिसमें बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) पूछे जाते हैं।

कक्षा 6 के लिए सिलेबस:

कक्षा 6 की प्रवेश परीक्षा में कुल 125 प्रश्न होते हैं और यह 300 अंकों की होती है। इसमें CBSE कक्षा 5वीं स्तर तक का सिलेबस पूछा जाता है। मुख्य विषय इस प्रकार हैं:

 * गणित (Mathematics): 50 प्रश्न (150 अंक)। इसमें प्राकृतिक संख्याएँ, LCM और HCF, यूनिटरी मेथड, भिन्न, अनुपात और समानुपात, लाभ और हानि, सरलीकरण, औसत, प्रतिशत, क्षेत्रफल और परिधि, साधारण ब्याज, रेखाएँ और कोण, तापमान, इकाइयों का रूपांतरण, रोमन अंक, कोणों के प्रकार, वृत्त, घन और घनाभ का आयतन, अभाज्य और भाज्य संख्याएँ, समतल आकृतियाँ, दशमलव संख्याएँ, गति और समय, संख्याओं पर संक्रियाएँ, पूरक और संपूरक कोण, भिन्नों का क्रम, आदि शामिल हैं। Bk Sir 

 * सामान्य ज्ञान (General Knowledge): 25 प्रश्न (50 अंक)। इसमें विज्ञान और सामाजिक अध्ययन से संबंधित प्रश्न होते हैं। इसमें भारत के राज्य, भारत के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य, रक्षा बलों में पद, भारत में परमाणु ऊर्जा स्टेशन, खेल और खेल से जुड़े शब्द, संक्षिप्त रूप, किताबें और लेखक, महत्वपूर्ण भौगोलिक शब्द, सामान्य विज्ञान, विश्व इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाएँ, आदि शामिल हैं।

 * भाषा (Language): 25 प्रश्न (50 अंक)। इसमें अंग्रेजी या क्षेत्रीय भाषा शामिल हो सकती है। इसमें Comprehension Passage, Preposition, Article, Vocabulary, Verbs और उनके प्रकार, Confusing Words, Question Tags, Types of sentence, Tense forms, Kinds of Nouns, Kinds of Pronouns, Correct Spelling, Ordering of words in sentence, Sentence Formation, Antonyms, Synonyms, Adjectives, Interjection, Idiom and Phrases, Collective Nouns, Number, Gender, Adverbs, Rhyming Words, Singular/Plural, आदि शामिल हैं।

 * इंटेलिजेंस (Intelligence): 25 प्रश्न (50 अंक)। इसमें सादृश्यता (गणितीय और मौखिक), पैटर्न (स्थानिक और गणितीय), वर्गीकरण, दृश्य, तार्किक, तर्क आदि से संबंधित प्रश्न होते हैं। इसमें श्रृंखला को पूरा करना, गणितीय संक्रियाएं, कोडिंग और डिकोडिंग, वर्गीकरण, सादृश्यता, अक्षरों की व्यवस्था, डिक्शनरी के क्रम में शब्दों की व्यवस्था, वाक्यों की उचित व्यवस्था, वर्णमाला परीक्षण, वेन डायग्राम, रक्त संबंध, दिशा, बैठने की व्यवस्था, रैंकिंग टेस्ट, पेपर कटिंग और फोल्डिंग, दर्पण/जल प्रतिबिंब, आकृति गणना, आकृति पूर्णता, घन और पासा, आदि शामिल हैं। Bk Sir 

कक्षा 9 के लिए सिलेबस:

कक्षा 9 की प्रवेश परीक्षा में कुल 150 प्रश्न होते हैं और यह 400 अंकों की होती है। इसमें CBSE कक्षा 8वीं स्तर तक का सिलेबस पूछा जाता है। मुख्य विषय इस प्रकार हैं:

 * गणित (Mathematics): 50 प्रश्न (200 अंक)। इसमें परिमेय संख्याएँ, एक चर वाले रैखिक समीकरण, चतुर्भुजों को समझना, डेटा हैंडलिंग (बार ग्राफ और लाइन ग्राफ), वर्ग और वर्गमूल, घन और घनमूल, राशियों की तुलना (प्रतिशत, लाभ और हानि), बीजीय व्यंजक और सर्वसमिकाएँ, क्षेत्रफल और परिधि, आयतन और पृष्ठीय क्षेत्रफल, घातांक और शक्तियाँ, संख्याओं के साथ खेलना, ठोस आकृतियों का दृश्यावलोकन, त्रिभुज (पाइथागोरस प्रमेय), यूलर का सूत्र, औसत, माध्य, बहुलक, प्रायिकता, पाई चार्ट, सीधा और प्रतिलोम अनुपात, गुणनखंड, ग्राफ का परिचय, एकिक विधि, विभाज्यता परीक्षण, त्रिभुज (कोण योग गुण), समानांतर रेखाएँ, साधारण ब्याज और चक्रवृद्धि ब्याज, समय और कार्य, वृत्तों का क्षेत्रफल और परिधि, बीजीय व्यंजक (जोड़, घटाव, गुणा, भाग), आदि शामिल हैं। Bk Sir 

 * अंग्रेजी (English): 25 प्रश्न (50 अंक)।

 * इंटेलिजेंस (Intelligence): 25 प्रश्न (50 अंक)।

 * सामान्य विज्ञान (General Science): 25 प्रश्न (50 अंक)। इसमें जीवाश्म ईंधन: कोयला और पेट्रोलियम, दहन और ज्वाला, कोशिका संरचना और कार्य, पौधों और जानवरों में प्रजनन, बल, घर्षण और दबाव, ध्वनि और उसके मूल सिद्धांत, प्रकाश का परावर्तन और अपवर्तन, धातु और अधातु, सिंथेटिक फाइबर और प्लास्टिक, विद्युत प्रवाह के रासायनिक प्रभाव, तारे और सौर मंडल, वायु और जल प्रदूषण, ग्लोबल वार्मिंग, सूक्ष्म जीव, कुछ प्राकृतिक घटनाएँ, ईंधन का कैलोरी मान कैसे ज्ञात करें, इलेक्ट्रोप्लेटिंग और कृत्रिम आभूषण, घर्षण के प्रकारों के बीच संबंध, फसल मौसम, कृषि पद्धतियाँ, पौधों और जानवरों का संरक्षण, बायोस्फीयर रिजर्व, राष्ट्रीय उद्यान और अभयारण्य, किशोरावस्था तक पहुंचना, यौवन के दौरान परिवर्तन, अंतःस्रावी ग्रंथियां और हार्मोन, आदि शामिल हैं।

 * सामाजिक विज्ञान (Social Studies): 25 प्रश्न (50 अंक)। इसमें भारतीय इतिहास, स्वतंत्रता संग्राम, भारतीय संविधान, भूगोल, संस्कृति और विरासत, सामाजिक विज्ञान, भूगोल: पृथ्वी की संरचना, वायुमंडल, जलवायु, प्राकृतिक संसाधन, नदियाँ, पर्वत, नागरिक शास्त्र: भारतीय संविधान, मौलिक अधिकार, संसद, न्यायपालिका, अर्थशास्त्र: कृषि, उद्योग, सेवाएँ, आर्थिक सुधार, आदि शामिल हैं।

यह सिलेबस आपको सैनिक स्कूल प्रवेश परीक्षा की तैयारी में मदद करेगा।#बीके सर 



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बागी बलिया का गौरवशाली इतिहास: विद्रोह, त्याग और बलिदान की गाथा बलिया... एक ऐसा नाम जो सुनते ही हर भारतीय के मन में साहस, स्वाभिमान और क्रांति की एक अमिट तस्वीर उभर आती है। यह सिर्फ एक जिला नहीं, बल्कि एक पहचान है – एक ऐसी पहचान जिसने इसे "बागी बलिया" का गौरवपूर्ण विशेषण दिया। गंगा और घाघरा (सरयू) जैसी पवित्र नदियों के संगम पर स्थित यह भूमि सदियों से ऋषि-मुनियों की तपस्थली और क्रांतिकारियों के लिए प्रेरणास्रोत रही है। इसका इतिहास सिर्फ विद्रोह का नहीं, बल्कि ज्ञान, अध्यात्म और संस्कृति का भी है। आइए, बलिया के गौरवशाली इतिहास को विस्तार से जानते हैं, जिसके पन्ने त्याग और बलिदान की कहानियों से भरे हुए हैं। प्राचीन काल: ऋषियों की भूमि बलिया का इतिहास इतना पुराना है कि यह पौराणिक कथाओं और वैदिक काल से जुड़ा हुआ है। माना जाता है कि इस पवित्र भूमि पर कई महान ऋषियों ने तपस्या की। * भृगु मुनि: बलिया का नाम सबसे प्रमुख रूप से महर्षि भृगु से जुड़ा है। उन्होंने इसी भूमि पर अपना आश्रम स्थापित किया था, जो आज भी भृगु मुनि मंदिर के रूप में मौजूद है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, उन्होंने भगवान विष्णु की छाती पर लात मारकर उनकी परीक्षा ली थी, जिससे उनकी सहिष्णुता और उदारता का पता चला। * वाल्मीकि और जमदग्नि: यह क्षेत्र रामायण काल से भी जुड़ा हुआ है। ऐसी मान्यता है कि महर्षि वाल्मीकि का आश्रम भी इसी के आस-पास था। इसके अलावा, ऋषि जमदग्नि की कर्मभूमि भी यही मानी जाती है। * ददरी मेला: बलिया का प्रसिद्ध ददरी मेला, जो भारत के सबसे बड़े पशु मेलों में से एक है, इसी प्राचीन विरासत का प्रतीक है। इसका नामकरण महान ददर मुनि के नाम पर हुआ था, जिनका आश्रम गंगा और सरयू के संगम पर था। इस तरह, बलिया ने प्राचीन काल से ही आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना का केंद्र बनने का गौरव प्राप्त किया। मध्यकालीन इतिहास: साम्राज्यों का हिस्सा मध्यकाल में बलिया बड़े-बड़े साम्राज्यों का हिस्सा रहा, लेकिन इसकी पहचान एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक या सैन्य केंद्र के रूप में नहीं बन पाई। यह दिल्ली सल्तनत और बाद में मुगल साम्राज्य के तहत आने वाले जौनपुर सल्तनत का हिस्सा था। इस दौरान यहाँ कई छोटे-बड़े रजवाड़े और जमींदारियां उभरीं। गंगा और सरयू नदियों के किनारे होने के कारण यह व्यापार और कृषि का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गया था। इस दौर में यहाँ विभिन्न समुदायों का आगमन हुआ, जिससे यहाँ की संस्कृति और सामाजिक ताना-बाना और भी समृद्ध हुआ। ब्रिटिश शासन और 'बागी बलिया' का उदय बलिया के इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण और क्रांतिकारी अध्याय ब्रिटिश राज के दौरान लिखा गया। जहाँ पूरे देश में आजादी की लड़ाई चल रही थी, वहीं बलिया में यह आंदोलन एक अलग ही रूप ले चुका था। यहाँ के लोगों में ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ एक गहरा रोष था, जो 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से लेकर 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन तक हर कदम पर दिखाई दिया। यह कहानी सिर्फ एक घटना की नहीं, बल्कि एक मिट्टी के स्वाभिमान की है। यहाँ के किसानों और युवाओं ने हमेशा ब्रिटिश सरकार की दमनकारी नीतियों, खासकर भू-राजस्व व्यवस्था (Land Revenue System) का खुलकर विरोध किया। 1942: जब बलिया ने खुद को आजाद घोषित किया आजादी की लड़ाई में बलिया का नाम हमेशा 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन (Quit India Movement) से जुड़ा रहेगा। महात्मा गांधी ने जब "करो या मरो" का नारा दिया, तो पूरे देश में क्रांति की लहर दौड़ गई, लेकिन बलिया में इस आंदोलन ने एक अभूतपूर्व रूप ले लिया। * विद्रोह की शुरुआत: 9 अगस्त 1942 को गांधीजी समेत सभी बड़े नेताओं की गिरफ्तारी के बाद पूरे देश में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। बलिया में भी छात्रों और युवाओं ने ब्रिटिश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। * मांगों का दबाव: स्थानीय नेताओं के नेतृत्व में हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए। उन्होंने सरकारी दफ्तरों, थानों और जेलों पर कब्जा करने की योजना बनाई। उनकी मुख्य मांग थी कि बलिया के सभी राजनैतिक कैदियों को तुरंत रिहा किया जाए। * 19 अगस्त 1942 की ऐतिहासिक घटना: 19 अगस्त को, बलिया के जिला कारागार के बाहर 50,000 से अधिक लोगों की भीड़ जमा हो गई। उन्होंने जेल का गेट तोड़कर सभी कैदियों को रिहा कर दिया। इस घटना ने ब्रिटिश अधिकारियों को हिला दिया। * समानांतर सरकार की स्थापना: इस विद्रोह का नेतृत्व कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता चित्तू पांडे ने किया। जनता के भारी दबाव और विद्रोह को देखते हुए, तत्कालीन ब्रिटिश कलेक्टर जे. सी. निक्सन को झुकना पड़ा और उसने चित्तू पांडे को बलिया का नया जिलाधिकारी (Magistrate) घोषित कर दिया। इसी के साथ, बलिया ने खुद को आजाद घोषित कर दिया और एक समानांतर सरकार (Parallel Government) की स्थापना की गई। * मात्र 13 दिनों की आजादी: बलिया ने लगभग 13 दिनों तक ब्रिटिश राज से मुक्त रहकर अपनी खुद की सरकार चलाई। यह भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में एक अनूठी और अद्भुत घटना थी। * अंग्रेजों का दमन: हालाँकि, यह स्वतंत्रता बहुत कम समय के लिए ही रही। 13 दिनों बाद ब्रिटिश सेना ने भारी संख्या में बलिया पर हमला किया। इस हमले में कई निर्दोष लोग मारे गए और समानांतर सरकार को कुचल दिया गया। चित्तू पांडे और उनके साथियों को गिरफ्तार कर लिया गया और उन पर भयानक अत्याचार किए गए। लेकिन इस घटना ने बलिया को "बागी" होने का सम्मान दिला दिया। आजादी के बाद का बलिया 1947 में भारत को आजादी मिलने के बाद भी बलिया का योगदान जारी रहा। यहाँ की मिट्टी ने कई महान व्यक्तित्वों को जन्म दिया, जिन्होंने देश और समाज के लिए महत्वपूर्ण काम किए। * मंगल पांडे: हालाँकि, सिपाही मंगल पांडे का जन्म बलिया से सटे नगवा गांव (बलिया और गाजीपुर की सीमा पर) में हुआ था, लेकिन उनके क्रांतिकारी चरित्र को अक्सर बागी बलिया की भावना से जोड़ा जाता है। * जयप्रकाश नारायण: लोकनायक जयप्रकाश नारायण, जिन्होंने 1970 के दशक में संपूर्ण क्रांति का नारा 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CONGRATULATIONS TO VC UPENDRA SINGH

15 August ko ध्वजा रोहड़ FLAG HOSTING AND 26 JAN KO FLAG UNFURLING झंडा फहराना कहा जाता है