बागी बलिया का गौरवशाली इतिहास: विद्रोह, त्याग और बलिदान की गाथा bk sir बलिया... एक ऐसा नाम जो सुनते ही हर भारतीय के मन में साहस, स्वाभिमान और क्रांति की एक अमिट तस्वीर उभर आती है। यह सिर्फ एक जिला नहीं, बल्कि एक पहचान है – एक ऐसी पहचान जिसने इसे "बागी बलिया" का गौरवपूर्ण विशेषण दिया। गंगा और घाघरा (सरयू) जैसी पवित्र नदियों के संगम पर स्थित यह भूमि सदियों से ऋषि-मुनियों की तपस्थली और क्रांतिकारियों के लिए प्रेरणास्रोत रही है। इसका इतिहास सिर्फ विद्रोह का नहीं, बल्कि ज्ञान, अध्यात्म और संस्कृति का भी है। आइए, बलिया के गौरवशाली इतिहास को विस्तार से जानते हैं, जिसके पन्ने त्याग और बलिदान की कहानियों से भरे हुए हैं। प्राचीन काल: ऋषियों की भूमि बलिया का इतिहास इतना पुराना है कि यह पौराणिक कथाओं और वैदिक काल से जुड़ा हुआ है। माना जाता है कि इस पवित्र भूमि पर कई महान ऋषियों ने तपस्या की। * भृगु मुनि: बलिया का नाम सबसे प्रमुख रूप से महर्षि भृगु से जुड़ा है। उन्होंने इसी भूमि पर अपना आश्रम स्थापित किया था, जो आज भी भृगु मुनि मंदिर के रूप में मौजूद है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, उन...
#BKSIR प्राचार्य से कुलपति बने उपेंद्र सिंह को हार्दिक बधाई! यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि आदरणीय प्रोफेसर उपेंद्र सिंह जी, जो अब तक एक सफल प्राचार्य के रूप में अपनी सेवाएँ दे रहे थे, अब उन्हें कुलपति (Vice Chancellor) जैसे गरिमामयी पद पर नियुक्त किया गया है। यह उपलब्धि न केवल उनके व्यक्तिगत समर्पण, कड़ी मेहनत और अकादमिक उत्कृष्टता का प्रमाण है, बल्कि उस संस्थान के लिए भी गौरव का क्षण है जहाँ उन्होंने अपना अमूल्य योगदान दिया है। प्रोफेसर उपेंद्र सिंह जी का प्राचार्य के रूप में कार्यकाल हमेशा प्रेरणादायक रहा है। उनके नेतृत्व में संस्थान ने शिक्षा, अनुसंधान और प्रशासनिक कार्यों में अभूतपूर्व प्रगति की। उन्होंने हमेशा छात्रों और शिक्षकों के कल्याण को प्राथमिकता दी, एक ऐसा वातावरण निर्मित किया जहाँ सीखने और नवाचार को बढ़ावा मिले। उनकी दूरदर्शिता, नवाचार और छात्र-केंद्रित दृष्टिकोण ने अनगिनत छात्रों के जीवन को सकारात्मक रूप से प्रभावित किया है। अब कुलपति के रूप में उनकी नई भूमिका उन्हें और भी बड़े स्तर पर शिक्षा जगत में महत्वपूर्ण बदलाव लाने का अवसर प्रदान करेगी। हमें पूर्ण विश्वास है क...
Bk sir 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) और 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) दोनों ही भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण दिन हैं, लेकिन इन दोनों दिनों में झंडा फहराने का तरीका और इससे जुड़ी परंपराएं अलग-अलग होती हैं। 15 अगस्त: ध्वजारोहण (Flag Hoisting) 15 अगस्त को ध्वजारोहण होता है। 1947 में जब भारत को आजादी मिली थी, तो उस समय ब्रिटिश झंडे को नीचे उतारकर भारत का तिरंगा ऊपर चढ़ाया गया था। इसी ऐतिहासिक घटना की याद में, हर साल 15 अगस्त को झंडे को रस्सी से खींचकर नीचे से ऊपर ले जाया जाता है और फिर उसे फहराया जाता है। * Bk sir कौन फहराता है: इस दिन प्रधानमंत्री ध्वजारोहण करते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि स्वतंत्रता के समय भारत में राष्ट्रपति का पद नहीं था, और प्रधानमंत्री सरकार के प्रमुख के रूप में देश का नेतृत्व करते थे। * जगह: यह समारोह नई दिल्ली के लाल किले पर होता है। 26 जनवरी: झंडा फहराना (Flag Unfurling) 26 जनवरी को झंडा फहराया जाता है। इस दिन हमारा संविधान लागू हुआ था और भारत एक गणराज्य बना था। इस प्रक्रिया में, झंडा पहले से ही पोल के ऊपर बंधा होता है और राष्ट्रपति सिर्फ रस्सी खींच...
Comments
Post a Comment